तर्क

 तर्क


किसी विषय में तथ्य प्रमाण सहितका विचार या मत अभिव्यक्ति तर्क है । तर्क व्यक्तिका वो बौद्धिक और मानसिक क्षमता है, जिसके माध्याम से अनुभवोंको सही अनुमान लगाकर उस अनुभव के बारे में ज्ञान आर्जन किया जा सकता है ।  तर्क सही अनुमान भी है । माया को जाननेके लिए परिकल्पना द्वारा माया का मॉडल बना के तर्क और प्रमाण द्वारा उसको सिद्ध किया जाता है ।


सत्य-असत्य, सहि-गलत, नैतिक-अनैतिक आदि का भेद पहचान करके यथार्थ ज्ञान लेने के लिए तर्क आवश्यक है । अस्तित्व अज्ञेय है, लेकिन मनुष्य अपनी बुद्धि के सीमा तक जानने का प्रयत्न करता रहता है । हर विषय में ज्ञानार्जन के लिए अपरोक्ष अनुभव संभव नहीं है । माया का अध्ययन के लिए प्रतिरुप बनाके तर्क या अनुमान द्वारा सिद्ध करना पड़ता है ।

 

अपरोक्ष अनुभव के साथ तर्क का प्रयोग करने से ज्ञान प्राप्त होता है और वो ज्ञान प्रमाणित हो जाता है । तर्क का उपयोग विषय पर सान्दर्भिक होना चाहिए । ठोस, प्रमाण, तथ्य और अपरोक्ष अनुभव पर आधारित होना चाहिए । विचार अभिव्यक्ति तार्किक होने से मात्र सत्य नहीं होता । विगत के अनुभव और यथार्थता पर भी आधारित होना चाहिए । जैसे कि “मेरे उद्यान में आम के पेड़ में कोला फलता है; आपके उद्यान में भी आम के पेड़ में कोला ही फलेगा” ये कथन तर्किक लग सकता है, क्यूँकि पहले कथन से दूसरे कथन सिद्ध हो रहा है, लेकिन ये सही नहीं है; क्यूँकि आजतक आम के पेड़ में कोला कहीं नहीं फला है । धुआँ को देखकर आग, बादल को देखकर वर्षा का अनुमान लगाया जा सकता है । उस पर तर्क किया जा सकता है; ये सही है, विगत में ऐसा होनेका पर्याप्त अपरोक्ष अनुभव है । तर्क शक्ति बढ़ाने के लिए बुद्धि तेज़ करना और चेतना का शुद्धीकरण करना आवश्यक है ।


व्यक्ति में जब अज्ञान का नाश होकर सत्य दिखाई देता है तब बुद्धि, विवेक एवं चेतना का परत खुलने लगता है, तार्किक क्षमता भी बढ़ने लगता है । ज्ञान के लिए विषय के अध्ययन में जब अपरोक्ष अनुभव संभव नहीं होता तब सही अनुमान लगकर तर्क का उपयोग करना चाहिए ।


तर्क एक प्रकार का चित्त वृत्ति है । चित्त में चलता है और बुद्धिके परत में होता है । जिस विषय पर ज्ञान का चर्चा हो रहा है, उसी विषयका सान्दर्भिक प्रश्न पर ही तर्क का उपयोग करना चाहिए । प्रसंग एक तरफ़ और तर्क दूसरी तरफ़ हुआ तो व्यक्ति हास्य का पात्र बन जाता है ।


तर्क बुद्धि पर आधारित होता है, किसी में अधिक और किसी में न्यून होता है । जिसमें अधिक बुद्धि है उसमें तर्क शक्ति भी अधिक होता है । जो अज्ञानी है वो तर्क से डरता है और ऊँचे आवाज़ से तर्क को दबाना चाहता है ।


विषय से सम्बन्धित प्रश्न और उसके गम्भीरता के आधार में कितना तर्क आवश्यक है ये निर्धारित होता है । जब प्रश्न का उत्तर आ गया, विषय स्पष्ट हो गया तो अनावश्यक तर्क करना भी उचित नहीं है ।


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