सुन्दरता
सामान्य अर्थ में जो दिखने में रूपवान हो, रमणीय हो, सौम्य हो, मन भावन हो वही सुन्दरता है । सभी अनुभव का एक सकारात्मक भाव और दृष्टिकोण सुन्दरता है । आध्यात्मिक दृष्टिकोण से सुन्दरता अस्तित्व का एक मिथ्या भाग है, एक परिवर्तनशील अनुभव है । यहाँ पर आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों दृष्टिकोण से मनन करने का प्रयास किया जाता है ।
अस्तित्व में सुन्दरता पूर्णता का भाग है बस । कोई कारण और विशेष महत्व नहीं है । यदि सांसारिक दृष्टिकोण से देखें तो कोई भी अनुभव रुचिकर और प्रिय होने के लिए सुन्दर होना आवश्यक है । व्यक्ति, वस्तु, कार्य जैसे कोई भी अनुभव को सकारात्मक रुपमें देखकर अच्छा व्यवहार करने और सफल बनाने के लिए सुन्दरता का भाव होना ज़रूरी होता है । अनुभव में सकारात्मक मानसिक भाव संचारित करने के लिए भी सुन्दरता उपयोगी है ।
अस्तित्व में तो सुन्दर-कुरुप एक समान रुपमें सर्वत्र व्याप्त है, हर अनुभव में है । सांसारिकता में भी हर दृष्टिकोण में है, हर व्यक्ति और वस्तुओं में है । हर समय, हर स्थान में है । रुपमें है, बनावट में है, भाव में है ।
सुन्दरता व्यक्तिनिष्ठ विषय है, परिवर्तनशील अनुभव है । इसीलिए आज का सुन्दर अनुभव कल कुरुप हो सकता है । शरीर भी बचपन से जवानी तक सुन्दर और बुढ़ापे में कुरुप हो सकता है । मन जब सुख में हो और साफ़ हो तो सुन्दर होता है । जब दुःख में हो और कपटी हो तो कुरुप हो सकता है । सभी वस्तुएँ नया में सुन्दर और पुराने हुए तो कुरुप दिखाई देते हैं । इस प्रकार से सुन्दरता सदा है, और चक्रीय है ।
अस्तित्व में सुन्दरता का मात्रा पूर्ण है, यानी की कम ज़्यादा नहीं है । व्यक्तिगत दृष्टिकोण से भी संख्या में नहीं मापा जा सकता लेकिन मात्रा कम या अधिक माना जा सकता है, ये व्यक्ति के अपने मानदंड में निर्भर होता है । इसीलिए सुन्दरता अगणित है ।
अस्तित्व अपने आप में पूर्ण और सुन्दर है । अस्तित्व को कोई विधि से सुन्दर या कुरुप नहीं बनाया जा सकता है । तात्त्विक सुन्दरता शाश्वत है । हम इस का सुन्दरता बिगड़ने न दें बस; इतना ही काफ़ी है, इतना ही कर सकते हैं हम अस्तित्व के सुन्दरता सम्वन्ध में । यदि सांसारिक दृष्टिकोण से देखें तो सुन्दरता का मानदण्ड हर व्यक्ति का अलग-अलग दृष्टिकोण हो सकता है । किसी के नज़र में सुन्दर चीज़ दूसरे के दृष्टि में कुरुप हो सकता है । शरीर को सुन्दर बनाने के लिए विभिन्न सौन्दर्य प्रसाधन, और प्रसाधक होते हैं । मन और मानसिक अनुभव को सुन्दर बनाने के लिए आध्यात्मिक मार्ग, गुरु और ज्ञान हैं । उपभोग्य वस्तुओं को सुन्दर बनाने के लिए अनेक प्रविधि, प्राविधिक और कारीगर होते हैं । कलाकार और कलाकारियाँ होते हैं । इन सभी का अपना अपना प्रक्रिया और विधि भी होते हैं । वस्तुओं का प्रारूप फेरबदल, काट-छाँट, थपघट, रंगरोगन आदि करके सुन्दर आकार दिया जा सकता है, उत्तरजीविता सुखदायी बनाने के लिए ।
अस्तित्व स्वयं सुन्दर है, इसीलिए हर अनुभव सुन्दर है । मन और बुद्धि भी असल संगत में सुन्दर और ख़राब संगत में पड़े तो कुरुप हो सकता है । जिस ज्ञान ने मुक्ति का मार्ग दिखाता है वही सुन्दर है । जिस व्यक्ति का मन साफ़ और निष्कपट हो, सेवा भाव हो वही सुन्दर है । जिस भी अनुभव ने मन में सकारात्मक भाव पैदा करवाता है, उन सभी अनुभव सुन्दर है । जो समय अपने अनुकूल और उपयुक्त है, वही सुन्दर है । जो स्थान मनमोहक और रमणीय हो, वही सुन्दर है ।
एक ज्ञानी के दृष्टिकोण में सुन्दरता केवल मिथ्या अनुभव है, असत्य है, लेकिन जो भी है पूर्ण और सुन्दर है यही अस्तित्वका गुण है । हर समय, हर स्थान और हर अनुभव मे व्याप्त है सांसारिकता में सुखद उत्तरजीविता के लिए सकारात्मक भाव होना जरुरी है । इसीलिए सुन्दरता सबको पसंद है ।
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