वाणी

 वाणी


वाणी व्यक्ति का आचरण, व्यवहार, सोच, विचार, भाव आदि का अर्थपूर्ण अभिव्यक्ति है । जो मन में है, वही वाणी से निकलता है । व्यक्तिका सोच, विचार, भावना जैसा है, उसी तरहका वाणी प्रकट होता है । विचार से वाणी, वाणी से कर्म और कर्म से कर्मफल आता है, ये चक्र में चलता है । वाणी संचार और व्यवहार का माध्याम भी है । जीव विकास क्रम में उत्तरजीविता संचालन के लिए हरेक जीव का अपना-अपना भाषा होता है, उसीके माध्याम से अपने वर्ग में संचार करते हैं । चित्तका विकास जितनी ऊँचे स्तर पर होता जाता है, उतनी ही वाणी भी परिस्कृत होता जाता है । सुसंरकार युक्त वाणी सभ्यता, शालिनता, नम्रता, बुद्धिमता और चेतनशीलता का परिचायक है ।


व्यक्ति का आचार, विचार, व्यवहार, नियत आदि परिष्कृत और समृद्ध बनाने के लिए वाणी शुद्ध होना जरुरी होता है । क्यूँकि वाणी ही मनका व्यक्त स्वरूप है । जीव में बुद्धि और चेतना के स्तर अनुसार वाणीका शुद्धता बढ्ता जाता है, उपयोग किस तरह से किया जाना चाहिए ? कैसे सकारात्मक भाव और सभ्यता प्रकट होता है ? इस तरफ़ सचेत रहता है, उस मुताबिक़ वाणी सुसंस्कृत बनानेका प्रयास करता है । कुछ प्रयोजन इस प्रकार हैः-

  • उत्तरजीविता वृत्ति संचालन में सहजता के लिए दूसरों के साथ अपना आवश्यकता, भावना और विचार अभिव्यक्त करना ।

  • आपसी अन्तरक्रिया और संचार सुमधुर बनाना ।

  • अवान्छित गतिविधियों और व्यवाहारों को नियन्त्रण करने के लिए आवश्यक नियम और व्यवस्था बनाके प्रसारित करना ।

वाणी विकास प्रकृतिका स्वभाविक प्रक्रिया है, अपने आप विकसित और परिस्कृत होता जाता है  । मानसिक स्वरुप, स्वभाव और व्यवहार में वाणीका सकारात्मक और नकारात्म प्रभाव होता है । क्यूँकि इन सभीका श्रोत एक ही नाद है । क्या क्या असल और खराब प्रभाव होते हैं और कैसे वाणी को मधूर और प्रभावशाली बनाया जाता है कुछ उपाय इस प्रकार हैं:-

वाणी का नकारात्मक पक्ष और प्रभाव

  • अधिक और अनावश्यक बोलनाः- मन में अशान्ति पैदा होता है । श्रोता में अधैर्य, वेवास्ता का भाव आता है, समयका दुरुपयोग होता है ।

  • कटु, हिंसक, क्रोध और इर्स्यापूर्ण एवं नकारत्मक वाणीः- नकारात्मक विचार और पश्ताताप बढ़ाता है, अवहेलना और ऊँच-नीचता का भाव उत्पन्न होता है । सम्वन्ध और छवि ख़राब होता है ।

  • अश्लिल और असभ्य भाषाः- आचरण दुषित होता है । समाजमें व्यक्तिका मर्यादा गिरता है ।  नैतिकता, ईमानदारीता नष्ट होता है ।

  • झुठ देखावटी और वनावटी वाणीः- असत्य को छिपाते छिपाते व्यक्ति झूठ के चक्रव्यूह और दलदलमें फसता जाता है ।

  • छल कपट और धोखा युक्त वाणीः- बुद्धि प्रदुषित और भावना कठोर होता है । बुरे प्रभाव लौटकर अपनी ओर ही आते हैं ।

वाणी का सकारात्मक पक्ष और बचन उपलब्धिमूलक बनाने का उपाय

  • अल्प वाणीः-  मौनता में सहयोगी होता है, धैर्यता और संयम आता है, कार्य ध्यान पूर्वक होते हैं और उत्तम प्रतिफल आते हैं ।

  • प्रिय और मधूर वाणीः-  वाणी में प्रभावकारिता आता है । अभिव्यक्ति फलदायक होता है । कर्तव्य परायणता वृद्धि होता है ।

  • शालीन और सभ्य भाषाः-  चित्त शुद्ध होता है, विचार उच्च और शुद्ध होता है, आत्म विश्वास और आत्म सन्टुष्टि बढ़ जाता है । 

  • सत्य और यथार्थ वाणीः- इमानदारिता, सत्यनिष्ठा, धैर्यता, विनम्रता जैसै गुण विकसित हो जाते हैं । आत्मज्ञान स्थिर हो जाता है ।


वाणी संचार के लिए प्रयोग होता है, और संचार में खास करके वक्ता, श्रोता और माध्याम होता है । जब वक्ता का वाणी शुद्ध, स्पष्ट, प्रभावकारी, एवं मधूर हो, तब ही श्रोता ने ध्यान पूर्वक सुनते हैं, और जो व्यक्त करने का प्रयास किया गया है वो फलदायी होता है । जब वाणी ही आवश्यक हो तब ही बोलना चाहिए, अन्यथा लिखकर, संकेत वा इशारा करके भी आवश्यक विचार अभिव्यक्त किया जा सकता है । प्रासंगिक और सान्दर्भिक विषय में ही बोलनी चाहिए । जितना आवश्यक हो उतना ही बोलना चाहिए । अनावश्यक विषय में अनावश्यक विचार व्यक्त करना निरर्थक और हानिकारक होता है ।


वाणीका उपयोग बहुत सावधानी के साथ करना पडता है । कहाँ किस तरहका वाणी बोलना उचित है ये समझ होना चाहिए । घर परिवार, सम्वन्धी, व्यवसाय, समाज आदि में अलग-अलग प्रकार से संचार होता है । प्रायः व्यक्तिगत और पारिवारिक विषय में अनौपचारिक एवं व्यवसायिक और सार्वजनिक क्षेत्र में औपचारिक भाषा का प्रयोग होता है । औपचारिक वा अनौपचारिक जो भी भाषा हो मधूर, मीठास युक्त, कोमल, प्रिय, शालीन वाणी और प्रश्तुति होना चाहिए । 


वाणी में सरस्वती रहतीं हैं । ज्ञानगंगा वाणी से प्रवाहित होता है । व्यक्ति का आचरण और नीयत वाणी से झलकता है । वाणी से ही शत्रु और मित्र बनते हैं । चित्त के सारे वृत्ति आपस मे अन्तर सम्वन्धित है, इसीलिए सभी प्रक्रया में शुद्धता आ जाता है । यदि वाणी शुद्ध हो तो मन, विचार, कर्म, कर्मफल सभी सुन्दर होतें है । सुन्दर कर्मफल से दुख का अन्त्य और जीवन मुक्ति सहज हो जाता है ।


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